मैं सोचा करता हूँ
उसकी हर मुस्कराहट को पसंद करता हूँ उसके हर मज़ाक पर हंसा करता हूँ उसकी हर अदा पर मरता हूँ पर फिर भी , न जाने क्यूँ , उसे पाने से ज्यादा , उसे खोने से डरता हूँ वो एक बार मेरी ओर देख ले,यही सोचा करता हूँ फिर मुझे देख कर वो मुस्कुरा दे,ये भी कल्पना करता हूँ कभी-कभी उससे मिलने की भी दुआ करता हूँ पर फिर भी , न जाने क्यूँ उसे पाने से ज्यादा ,उसे खोने से डरता हूँ वो क्या सोचती होगी मेरे बारे में,यही सोचा करता हूँ यही सोच सोच कर , टाइम PASS करता रहता हूँ वो चाहे मेरी हो या न हो जहाँ भी रहे ,बस खुश रहे ,यही दुआ करता हूँ इसीलिय उसका प्यार पाने से ज्यादा , उसकी दोस्ती खोने से डरता हूँ बस इसी तरह जिंदगी जिया करता हूँ उससे प्यार तो करता हूँ पर उसे कहने से डरता हूँ क्यूंकि न जाने क्यूँ , उसे पाने से ज्यादा ,उसे खोने से डरता हूँ ........लेख़क - अविनाश पंडित